डीएनए
अणुओं में छिपी तमाम सूचनाओं को एकत्रित करने और विभिन्न रोगों का इलाज
करने के उद्देश्य से बिगल इंस्टीट्यूट ऑफ इजराइल के प्रोफेसर यहूद सपीरो और
साथी वैज्ञानिकों ने एक अति सूक्ष्म डीएनए कम्प्यूटर बनाया है। ये
कम्प्यूटर इतने सूक्ष्म हैं कि लगभग एक अरब डीएनए कम्प्यूटर एक टेस्ट ट्यूब
में समा सकते है। इन कम्प्यूटरों की सहायकता से एक अरब ऑपरेशन एक साथ ही
किया जा सकता है। और वह भी करबी 99.8 प्रतिशत सफलता के साथ। यह विश्व का
पहला ऐसा प्रोग्रामयुक्त कम्प्युटिंग मशीन है, जिसके इनपुट, आउटपुट और
साफ्टवेयर और यहां तक की हार्डवेयर भी जैविक अणुओं से तैयार किए गए है।
इसका प्रयोग काफी सरल है। भविष्य में इसकी मदद से मानव कोशिकाओं के अंदर
रखकर ऑपरेशन किया जा सकता है लेकिन इन कम्प्यूटरों को अकेले चलाना संभव
नहीं हो सकता।
डीएनए के दो घुमावदार अणुओं में, जिनमें मानव जीन सुरक्षित रहते है, चार
रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं। इन तत्वों को ए (एडनिन), टी (थाइमिन), सी
(साइटोसिन), और जी (ग्वानिन) कहा जाता है। ये तत्व डीएनए अणुओं में प्रोटीन
बनाने का काम करते हैं तथा इनमें स्मरण शक्ति काफी अधिक होती है। इस
कम्प्यूटर में आकड़े दो अणुओं में सुरक्षित रहते हैं और इसके साथ दो इंजाइम
हार्डवेयर का काम करते हैं जो सूचनाओं के कोड को पढ़ने और कॉपी करने का काम
कारते है। इन सबको जब एक टेस्ट ट्यूब में रखा जाता है तब सॉफ्टवेयर और
हार्डवेयर इनपुट अणु के रूप में कार्य करता हैं और फाइनल ऑउटपुट निकलता है।
इस डीएनए कंम्प्यूटर में ऊर्जा की खपत काफी कम होते है, फलस्वरूप इसे
मानवकोशिकाओं के अंदर रखने पर कार्य के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता नहीं
होती है।
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